क्या तैमूर को मोगली दिखाएंगी करीना कपूर खान? ये रहा जवाब

नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज मोगली जल्द ही दिसंबर में शुरू होने जा रही है. सीरीज की हिंदी डबिंग के लिए कई बॉलीवुड एक्टर्स ने अपनी आवाज दी है. इसमें हिंदी वर्जन के लिए अनिल कपूर बलू का वॉइस ओवर किया है. माधुरी दीक्षित ने मोगली की भेड़िया मां निशा का, बगीरा का वॉइस ओवर किया है अभिषेक बच्चन ने, जैकी श्रॉफ ने शेर खान का और करीना कपूर खान ने एनाकोंडा Kaa का VO किया है.

सीरीज की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सभी सितारे मौजूद थे एक मीडियाकर्मी ने पूछा कि क्या वे अपने बच्चों को मोगली दिखाना चाहेंगी. तो इस पर अभिषेक बच्चन ने साफ तौर पर कहा कि हां वह आराध्या को ये वेब सीरीज दिखाना चाहेंगे. हालांकि करीना कपूर खान का जवाब अभिषेक के जवाब से थोड़ा अलग था.

अभिषेक के जवाब के बाद करीना ने कहा कि हां वह तैमूर को ये सीरीज दिखाना तो चाहेंगी लेकिन अभी नहीं. बता दें कि मोगली लीजेंड ऑफ द जंगल के हिंदी वर्जन को नेटफिल्क्स पर 7 दिसंबर को रिलीज किया जाएगा. भारतीय-अमेरिकी बाल कलाकार रोहन चंद मोगली के रूप में नजर आएंगे. मैथ्यू राइज लॉकवुड और फ्रीडा पिंटो मेसुआ की भूमिका निभाते दिखेंगे.

आपको बता दें कि राजस्थान के अलवर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई टालने का आरोप लगाया था. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस खतरनाक खेल कर रही है. सुप्रीम कोर्ट अयोध्या पर लोगों की बात सुनकर फैसला करना चाहती है, लेकिन कांग्रेस महाभियोग लाकर सुप्रीम कोर्ट के जजों को डरा रही है.

कपिल सिब्बल ने राम मंदिर की सुनवाई टालने की अपील की थी

पिछले साल कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर मामले की सुनवाई जुलाई 2019 तक टालने की अपील की थी. सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड का पक्ष रखते हुए कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि राम मंदिर मामले की सुनवाई को जुलाई 2019 तक टाल दिया जाए, क्योंकि मामला राजनीतिक हो चुका है. कपिल सिब्बल और राजीव धवन की ओर से कोर्ट में दलील दी गई थी कि इस मामले की जल्द सुनवाई सुब्रमण्यम स्वामी की अपील के बाद शुरू हुई, जो कि इस मामले में कोई पार्टी भी नहीं हैं.

सिब्बल ने कहा था कि कोर्ट को देश में गलत संदेश नहीं भेजना चाहिए, बल्कि एक बड़ी बेंच के साथ मामले की सुनवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के साल 2014 के घोषणापत्र में शामिल है. लिहाजा कोर्ट को बीजेपी के जाल में नहीं फंसना चाहिए.

कपिल सिब्बल ने कोर्ट से कहा था कि देश का माहौल अभी ऐसा नहीं है कि इस मामले की सुनवाई सही तरीके से हो सके. इस मसले को लेकर हड़बड़ी में सुनवाई हो रही है. सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल ने मांग की थी कि मामले की सुनवाई 5 या 7 जजों बेंच को साल 2019 के आम चुनाव के बाद करनी चाहिए, क्योंकि मामला राजनीतिक हो चुका है.

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