राहुल गांधी को कैसे मिला ‘कौल’ गोत्र?
बात दो मई, 1991 की है. तपती धूप में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने चुनाव प्रचार के बीच पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में आकर संकल्प लिया था. देश में आम चुनाव का माहौल था, राजीव की कांग्रेस पार्टी विपक्ष में थी और माना जा रहा था कि राजीव वापसी कर सकते हैं. राजीव गांधी का पुष्कर से कुछ ख़ास लगाव था . उन दिनों राजस्थान में राजीव के क़रीबी रहे एक नेता ने बताया, "वह पहली बार पुष्कर 1983 में आए थे जब वे कांग्रेस पार्टी के महासचिव थे. बतौर प्रधानमंत्री भी वे 1989 में पुष्कर आए और ब्रह्मा मंदिर में पूजा-अर्चना की." लेकिन दो मई, 1991 की उनकी पुष्कर यात्रा के महज़ 19 दिन बाद तमिलनाडु में राजीव गांधी एक बम धमाके का शिकार हो गए. उनकी मृत्यु के एक हफ़्ते बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन पुष्कर में किया गया जिस दौरान राजेश पायलट और अशोक गहलोत जैसे नेता मौजूद थे. परिवार के पुरोहित दीनानाथ कौल ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, "ये सभी नेता तीन हफ़्ते पहले भी राजीव जी के साथ यहाँ मौजूद थे. राजीव तीन बार पुष्कर आ चुके थे और उनकी मौत की ख़बर मिलने पर शहर कई दिनों तक सदमें में रह...